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008 220601s2000 xx 000 0 hin d
020 _qHB
041 _aहिन्दी
082 _a891.437009 (PAR)
_bTRI P0
100 _aत्रिपाठी, विश्वनाथ
245 0 _aदेश के इस दौर में
_bपारसाई के व्यंग्य-निबन्घो की विवेचना
_cविश्वनाथ त्रिपाठी
260 _aनई दिल्ली
_bराजकमल प्रकाशन
_c2000
300 _a112 p.
650 _aहिन्दी
653 _a1. हिन्दी. ।. पुस्तक न।म.
942 _2ddc
_cBK
999 _c16838
_d16838